Delhi-Jaipur Highway बना मौत का कॉरिडोर : 10 महीने में 377 मौतें, गुरुग्राम में 31 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित

आंकड़ों के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि गुरुग्राम सीमा में हर महीने औसतन 37 से अधिक लोगों की मौत सड़क हादसों में हो रही है। इसका मतलब है कि हर तीसरे हादसे में किसी न किसी की जान जा रही है, जो हाईवे की मौजूदा स्थिति की भयावह तस्वीर पेश करता है।

Delhi-Jaipur Highway : राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर यात्रा करना अब गुरुग्रामवासियों के लिए एक खतरनाक चुनौती बन गया है। देश के इस प्रमुख कॉरिडोर पर पिछले दस महीनों में भयावह सड़क हादसों की लंबी श्रृंखला दर्ज की गई है, जिसने इसे ‘मौत का गलियारा’ बना दिया है।

गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जनवरी से 31 अक्टूबर तक इस हाईवे पर 900 से अधिक सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें 377 अमूल्य जिंदगियां असमय काल का ग्रास बन गईं और 500 से अधिक लोग घायल हुए।

आंकड़ों के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि गुरुग्राम सीमा में हर महीने औसतन 37 से अधिक लोगों की मौत सड़क हादसों में हो रही है। इसका मतलब है कि हर तीसरे हादसे में किसी न किसी की जान जा रही है, जो हाईवे की मौजूदा स्थिति की भयावह तस्वीर पेश करता है।

ट्रैफिक पुलिस की स्पेशल टीम द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई है कि दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह रात के समय इन स्थानों पर रोशनी का अपर्याप्त होना या बिल्कुल न होना है। डीसीपी ट्रैफिक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि गहन विश्लेषण के बाद कुल 31 ऐसे हाई-रिस्क प्वाइंट्स को चिन्हित किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया, “इन सभी स्थानों पर सबसे बड़ी समस्या अपर्याप्त या बिल्कुल भी रोशनी का न होना है। अंधेरे के कारण चालक को अचानक सामने आने वाले अवरोध, जैसे कि खराब या खड़े ट्रक, टूटे डिवाइडर, या सड़क पार करते पैदल चलने वाले लोग, देर से दिखाई देते हैं। तेज रफ़्तार में दृश्यता की कमी से भीषण हादसे होते हैं। यह केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि इस राष्ट्रीय महत्व के हाईवे की कार्यक्षमता का भी गंभीर मुद्दा है।

हाईवे के 18 अत्यधिक खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स : ये वे स्थान हैं जहां बार-बार गंभीर दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें पंचगांव चौक, इफको चौक, राजीव चौक, बिलासपुर चौक, बिनौला फ्लाईओवर, मानेसर बस स्टैंड, खेड़की दौला टोल प्लाजा, शंकर चौक, वाटिका चौक, नरसिंहपुर कट, एंबियंस मॉल, सुभाष चौक, सरहौल टोल, घामडोज टोल प्लाजा, कापड़ीवास, एटलस चौक, एनएसजी कैंपस मानेसर और आईएमटी मानेसर चौक शामिल हैं।

शहर के 13 उच्च जोखिम वाले अर्बन स्पॉट्स: ये शहर की शहरी सड़कों पर स्थित वे क्षेत्र हैं, जहां दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है, खासकर रात के समय। इनमें रामपुरा चौक, 32 माइलस्टोन प्रवेश, झारसा अंडरपास, केएमपी टोल, सिग्नेचर चौक, हीरो होंडा चौक, फर्रुखनगर चौक, सेक्टर 42/43 मेट्रो स्टेशन, जैनपैक्ट चौक, सिद्धेश्वर चौक, खुशबू चौक, बख्तावर चौक और सेक्टर 4/7 चौक शामिल हैं।

जाँच रिपोर्ट आने के बाद, ट्रैफिक पुलिस ने तत्काल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में इन सभी जानलेवा स्पॉट्स पर तुरंत बुनियादी ढांचे में सुधार करने का आग्रह किया गया है।

हाई-मास्क लाइट्स: फ्लाईओवर के नीचे, टोल प्लाजा के पास और बड़े जंक्शनों पर, जहां अंधेरा सबसे घना होता है, वहां हाई-मास्क लाइट्स लगाई जाएं।

सोलर स्ट्रीट लाइट्स: उन क्षेत्रों में जहां बिजली की आपूर्ति में समस्या है, वहां स्थायी समाधान के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइटें लगाने का सुझाव दिया गया है।

रिफ्लेक्टिव मार्कर: रोशनी के साथ-साथ डिवाइडरों और सड़क के किनारों पर हाई-इंटेंसिटी रिफ्लेक्टिव मार्कर भी लगाए जाने चाहिए, ताकि दृश्यता में सुधार हो सके।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker!